सुन ली खुदा ने वो दुआ तुम तो नही हो ,
दरवाजे पे दस्तक की सद तुम तो नही हो ।
महसूस किया तुम को तो गीली हुई पलके ,
भीगे हुए मौसभ की अदा तुम तो नही हो ।
अन्जानी सी राहों में नही कोई भी मेरा,
किसने मुझे यूँ अपना कहा तुम तो नही हो ।
दुनियाँ को बहरहाल गिले शिकवे रहेंगे ,
दुनियाँ की तरह मुझ से खफ़ा तुम तो नही हो ।
सिमटी हुई शर्मायी हुई रात की रानी ,
सोई हुई कलियों की हया तुम तो नही हो ।