पहले जब कोई हमारे message देखकर नज़र -अंदाज़ करता था, तो दर्द हमें होता था,
पर अब वही शख्स आज इस कदर कर रहा है नजर-अंदाज हमारे message को, फिर भी अब दर्द नहीं होता,
अब शायद हम जिंदगी जीना सीख गए,
पहले वो घंटों बातें करना, और अब बस २-४ शब्दों में ही हो जाती है बातें, फिर भी अब दर्द नहीं होता,
शायद वह शक्खस हमें जिंदगी जीने का सलीका सीखा गया, उसका ये सलीका बेहद गजब है,
पहले जिस मोड़ पर छोड़ दिया था उसने, आज फिर वही मोड़ से मुलाकातें शुरू की है,
पहले हम अपने रूतबे को बाजु पर कर लेते थे बातें, अब सिर्फ हम रुतबे से ही करेंगे बातें उनसे,
वह तो ऐसा ही है आज भी जैसे वह पहले था,
बदल तो हम गए है, और ये बदलाव भी जरूरी है हमारे में,
क्यूंकि अब दर्द सहा नहीं जाता हमसे,
और अब वह शक्खस के बर्ताव से कोई फर्क नहीं पड़ता हमें,
उसके बिना भी जिंदगी हसीन थी, वह था फिर भी हसीन थी, और अब फिर से वह एक रोज़ न होगा तो जिंदगी ओर बेहतरीन और हसीन होगी।