जो लोग अपनी आय से अधिक खर्च करते हैं, अत्यधिक दान करते हैं, वे कई प्रकार की परेशानियों का सामना करते हैं। आय से अधिक दान करते हैं, आमदनी कम होने या धन अभाव होने पर भी शौक पूरे करना, मौज-मस्ती करना, फिजूलखर्च करना पूरे परिवार को संकट में फंसा सकता है। इस काम से अपमान ही मिलता है।
दान करना चाहिए, लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि बहुत अधिक मात्रा में या अपनी आय से अधिक दान न करें। पुराने समय में राजा हरिशचंद्र का प्रसंग इस बात का उदाहरण है। राजा हरिशचंद्र ने अपनी संपत्ति विश्वामित्र को दान कर दी थी। इस कारण राजा की पत्नी और पुत्र को भी भयंकर परेशानियों का सामना करना पड़ा था।