’’ छोटे से कमरे में’’
सब कुछ
सकेल ले गए हो तुम
भावनाओं की भूख
प्यास आँखों की
मिटें
ऐसा कुछ भी तो नहीं
इस छोटे से कमरे में
नन्हीं नर्म चुलबुली धूप
खिड़की से कूद
मेरे गालों पर
खेलती गौरैया सी
गोया गुदगुदाते मुस्कुराते कहती - गुड मार्निंग
तुम मुझसे
सटे
इस छोटे से कमरे में
कहीं जाने से पहले
खीचकर तलाशता है
बिलकुल तुम्हारी तरह दर्पण
मेरे चेहरे पर
सिंदूर के धब्बे कहीं बिंदी
चैंक पड़ता है कभी
केश, कमीज पर देख मेरे ही
टूटे
इस छोटे से कमरे में
तेरे रूप से भीनी अजीब सी गंध
बिखर सपनों के संग
तुम्हारी तरह
करीब और करीब
मुझे रखना चाहती है
नींद से दूर
छूटे
इस छोटे से कमरे में
लटकाए
दरवाजे के आजू बाजू
जो तूने ग्रीटिंग कार्ड््स
जोड़ जोड़
लटक रहा तुम्हारी बाली सा
झूमर तेरी नथनी
मेरी नाक पर
अब तब
डटे
इस छोटे से कमरे में