तेरे स्वरूप के वर्णन को,
हैं शब्द नही अब मेरे पास।
सूनी धरा है है रिक्त आकाश,
है शब्द नही अब मेरे पास।
मेरे तरकश में अब तीर कहां,
मैं ढूंढू उनको यहां वहां।
जो हैं वो भी यूं भरमाते हैं,
चूकने का भय दिखलाते हैं।
कैसे पूर्ण होगी तलाश,
हैं शब्द नही अब मेरे पास।
तेरा परचम लहराएगा,
ये तुझको वचन मैं देता हूं।
हो जाऊं भले मैं पूर्ण निशब्द,
पर प्रण आज मैं लेता हूं।
रचनाओं से मै रंग भर दूंगा,
तेरे नभ में अब नित नव प्रकाश।
नही अब मुझको चिंता भी क्षणिक,
कि शब्द नही अब मेरे पास।