दर्द-दिल्लगी
तुम सनम चली जावोगी मगर
यादों का गगन टिमटिमाता रहेगा
अपनें मुखकमल को छुपावोगी मगर
फुलोंका आॅंगन महकता रहेगा
तुमने खुशियों के पल मुझे दिये
जिंदगी जीनेके हल मुझे दिये
आॅंसूओने कौनसे सवाल किये
चले जा रहेहो दिलमें दर्द लिये
अकेलेपन में याद करना मुझे
बिता वक्त सहलायेगा तुझे
रुठना मनाना सतायेगा तुझे
सच्चा प्यार बतायेगा तुझे
मेरे दर्द की परवाह न करना
मुझे कभी अपना न कहना
लेकिन भुलसे जिंदगी से ये न कहना
किसीने मुझेसे कि थी "दिल्लगी"
----सुर्यांश (suryakant majalkar)