भावनात्मक कविता
**उड़ान बाकी है*
राहें तो है बहुत मिल चुकी
पर मनचाही मंजिल पाना अभी बाकी है।
चलना धीरे-धीरे तो सीख लिया
पर हवा से बातें करना अभी बाकी है।
हौसलों की उड़ान बाकी है......
सफलताएं तो बहुत मिल चुकी पर
मील का पत्थर मिलना बाकी है।
अंतर्मन की गहराई में
दबा सपना अभी बाकी है
हौसलों की उड़ान बाकी है....
पल पल बीत रही जिंदगी
पर खुलकर जीना बाकी है
खुशियां तो हैं बहुत पर
मन का सुकून पाना बाकी है।
पाने को मंजिल मनचाही
जिद पर आना बाकी है।
हौसलों की उड़ान बाकी है.....
प्रेम का रूप देखा है तुमने
शक्ति रुप दिखाना बाकी है
नारी कोमल है कमजोर नहीं
दुनिया को दिखाना बाकी है
हौसलों की उड़ान बाकी है......
एक अध्याय गुजर गया पर
पूरा ग्रंथ अभी बाकी है।
मेरा समर्पण तो देख लिया तुमने
पर प्रसिद्धि देखना बाकी है।
हौसलों की उडान बाकी है....
मां हूं, बेटी हूं, पत्नी भी हूं
पर अपनी पहचान बनाना बाकी है
जाने लोग मुझे मेरे दम से
ऐसा नाम कमाना बाकी है
हौसलों की उड़ान बाकी है......
कलम हाथ में थाम तो ली है।
पर धार लगाना बाकी है
याद रखे दुनिया जिसको
वह इतिहास लिखना बाकी है।
हौसलों की उड़ान बाकी है.....
*अर्चना राय भेड़ाघाट जबलपुर मध्य प्रदेश*