#काव्योत्सव - २
एक मेरा यारा
एक पल को जीना चाहा तो
ग़म ने भुझा दिया
ग़म छुपाना चाहा तो
झूट का सहारा लिया
झूट मिटाना चाहा तो
आँख भर आई
आँख जो मेरी भरी तो
याद तेरी आई
दिल का फलसफा कह ता भी तो कैसे
खुद में हौसला पाया जो काम मैंने
दिल को सहारा एक तुझी से मिला
तू ही था मौला तू ही था यार
- कुमार