दिल के जज्बात को दिल में बसाये रखा है
हमनें चेहरे पर एक परदा गिराये रखा है।
वो चले आते है रूह मे मेरी खामोशी से
हमनें निगाहों को दरवाजे पर सजाये रखा है।
हो गया है चाहतो का शुरू सिलसिला देखो
तुमनें हमको क्यों सीने से लगाये रखा है।
छोड़ देते हो जमाने हमें रूलाने के लिए
बेमुरव्वत तुमने क्या तमाशा लगाये रखा है।
इश्क हम ऐसे ही नहीं करते हैं तुम से सनम
तेरी मासूम अदाओं ने दिवाना बनाए रखा है ।
दिव्या राकेश शर्मा