#शायरी
लो खत्म हुआ ये दोर भी यारो
जिसमे बाते करते हजारो थे
दिखाबे के रिस्तो में हम भी
हर रोज कहानी सुनते थे
एक करिश्मा अच्छा हुआ
जो तकलीफों ने खेरा हमे
मतलब के रिसते भी झट गये
मन से सारे बेहम भी मिट गये
हुआ कौन किसी का जग में
हम भी किसी के कहा हुये
मतलब के रिस्तो की खातिर
कभी आधे कभी पूरे बट गये
हुआ अचम्भा देख कर हमको
जब जीवन के सारे भेद समझ गये
आधी आधी रात तक जागे
जुगनू जैसे हम भी हो गये
गायब हुये जो तारे सारे
पूनम संग कई चान्द भी छिप गये
✍ RJ Krishna ✍