उदास मन है,अधूरे सपने है,
दूख जिंदगी मे बेहिसाब है,
क्या इसी तरह जीना है?
क्या यही जिन्दगी है?
काट तो दू पल भर मे
मै ये जिन्दगी मगर
अब तो वक्त भी वक्त
लगाता है बीत जाने मे,
क्या इसी तरह जीना है?
क्या यही जिन्दगी है?
फैले भ्रष्टाचार मे न अब
न्याय की कोई आशा है।
ऐसा है ये यूग की इन्सान ही
इन्सान के खून का प्यासा है।
क्या इसी तरह जीना है हमे?
क्या यही जिन्दगी है?
न जी भर कर जिया जाता है
ना चाहने से मौत ही आती है
कदम-कदम पर मिलते
इस दुनिया मे धोके है
क्या इसी तरह जीना पडेगा हमे?
क्या यही जिन्दगी है?