मेरी जन्मदात्री
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कर संतुलित स्वयं को
हड़बड़ाती सी
दौड़ती हो चहुं ओर
हाथों ,बातों से करती जादू
सुख में दुख में
डूबती उतराती
पर तत्पर रहती हरदम
आगे कदम बढ़ाती
बन संबल सबको थामती
स्नेहमयी मां बन
दुलराती पुचकारती
हर संबंधों पर खुद को
न्योछारती
मुझमें गढ़ती अपनी पहचान
मां !तुम क्या हो ?
शक्तिपुंज
या
मेरी जन्मदात्री
मां !तुम हो तो हम हैं
तुम्हें नमन है।
तुम्हें नमन है।।
तारा गुप्ता
मातृ दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं