MATRUBHARATI Marathi
#KAVYOTSAV_2
#marathi
२.
कविता -त्या काळी -या काळी
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सुंदर जग होते आपले
भेटत होतो रोज त्याकाळी ।।
छोटेसेच ते जग आपले
होतो दोघेच दोघे त्याकाळी ।।
होते खरेच प्रेम ते आपले
एकमेका सोबत त्याकाळी ।।
जळूनी गेले प्रेम आपले
ज्वालेत विरोधाच्या त्याकाळी ।।
जगात ना उरले आपले
झालो विजनवासी याकाळी ।।
तू ही एकटी, मी ही पोरका
जगणे असेच भाळी याकाळी ।।
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कविता- याकाळी -त्याकाळी
-अरुण वि.देशपांडे-पुणे.
9850177342
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