इश्क की गली
इश्क कहो या प्रेम कहो
दोनों जुदा नही एक हैं
मैं हूं इश्क का फरिश्ता
यह इंसान की जरुरत है
इश्क की गली वासना की नही
यह तो इबादत की गली है
इस गली का हर मकान
पूजा का घर है
यहां हवस नही
इश्क की पूजा होती है
आओ मीरा की गली घूमो
आखरी मकान मेरा है