Hindi Quote in Poem by Devanshu Patel

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# काव्योत्सव २.०
विषय: भावनाप्रधान
शीर्षक: गर्भपात

मैं तेरी बच्ची थी
कोख़ में पलती थी
प्यारी प्यारी थी
ओ माँ, ओ माँ, ओ माँ, ओ माँ

प्रभु ने बख्शी थी
गर्भमें रखी थी
मै खुद नहीं आईथी
ओ माँ, ओ माँ, ओ माँ, ओ माँ

सुख से मैं सोती थी तेरी पाके झोली
ढ़ेर सारी परियां थी मेरी हमजोली
मेरे इस धरती पे
ख़ुशी से आने की
दुआ वो करती थी
ओ माँ, ओ माँ, ओ माँ, ओ माँ

सपने संजोए थे माँ, मैंने मेरे मन से
लिपटी रहूँगी में माँ मैंतो तेरे तन से
पीऊँगी दूध तेरा
खिले तेरा चेहरा
मैं धन्य हो जाउंगी
ओ माँ, ओ माँ, ओ माँ, ओ माँ

कितना भयानक, दिन था वो मनहूस
ज़रुरत नहीं है मेरी, किया ऐसा महसूस
जुदा मनसे किया,
जुदा तनसे किया
मैं कर क्या सकती थी
ओ माँ, ओ माँ, ओ माँ, ओ माँ

क्या तू जानती हैं माँ, रोई थी मैं कितना
मेरे साथ रो रहा था सारा स्वर्ग इतना
हुआ दुःख जब देखा
खुदा को खुद रोता
मैं रुक नहीं पाई थी
ओ माँ, ओ माँ, ओ माँ, ओ माँ

देवांशु पटेल

Hindi Poem by Devanshu Patel : 111164618
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