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GHAZAL
मोहब्बत है या नहीं उसको मैं कुछ कह नहीं सकता,
बस इतना जानता हूँ मैं बग़ैर उसके रह नहीं सकता,
ये मोहब्बत की दिवारें हैं मोहब्बत के लोग रहते हैं,
नफ़रतों की निगाहों से मकाँ ये ढ़ह नहीं सकता,
एक मैं ही नहीं अपाहिज बग़ैर उसके मेरे यारों,
ये वक़्त भी चल नहीं सकता ये दरिया बह नहीं सकता,
ये तक्सीमें मेरे घर की कहीं ये बाँट न दे आँखें,
इन ख़्वाबों के हंगामों को अब मैं सह नहीं सकता,
Written by~"NISHANT"