#काव्योत्सव *के लिए
भावनात्मक कविता
वृद्धा आश्रम*
हे परमेश्वर! यह क्या हाल हो गया
क्यों? जग से नेह का सरोवर सूख गया
जन्म दिया जिन मां बाप ने
क्यों बेटों ने उन्हें वृद्धा आश्रम दिया
शर्म लाज तो नहीं रही
क्या कर्तव्य का बोध
भी मर गया है?
हे परमेश्वर ....
जिस मां ने दूध पिलाया
खुद गीले में सो कर
तुझे सूखे में सुलाया
तेरे एक-एक सुख के बदले
कष्ट जीवन भर उठाया।
तूने उसे ही खून के आंसू रुलाया
क्या तुझे जमीर ने न धिक्कारा।
हे परमेश्वर .....
तेरे शौक के लिए जिस पिता ने
अपनी जरूरतों को भी कम कर लिया।
तेरे मांगने से पहले
उपहार ला कर दिया ।
उस पिता को तूने निढाल कर दिया
क्या तेरी अंतरात्मा ने न पुकारा
जीवन की संध्या बेला में
खुशियों के बदले ।
तूने वृद्धा आश्रम दिया।
हे परमेश्वर .....
याद रख फिर यही दिन आएगा।
जवानी का दर्प उतर जाएगा।
और बुढापा नजर आएगा।
तेरा बेटा भी तुझको एक दिन
वृद्धा आश्रम ले जाएगा
तुझे तेरे कर्मों का फल मिल जाएगा।
मां-बाप की तड़प का
अंदाजा हो जाएगा।
उनके प्रेम की अहमियत का
पता लग जाएगा।
__*अर्चना_* राय_ भेड़ाघाट जबलपुर मध्य प्रदेश*