कोई फासला ना हो
तेरे मेरे दरमियाँ।।
मेरी चाहत हमेशा से
थी बस यही।
मेरी दुनिया का
तू सूरज रहे
चमकता रहे
ठंडी की धूप सा
मेरी चाहत हमेशा से
थी बस यही।।
चमन की कलियों सी
मैं खिलती रहूँ
महकती रहूँ
बिखरती रहूँ
ग़र कटूँ डाल से
बस यही हश्र हो
तेरे ही चरणों की
शोभा बनूँ
मेरी चाहत हमेशा से
थी बस यही।।।
तू जान है मेरी
मैं छाया हूँ तेरी
तेरे बिन तू बता
क्या चाहूँ ज़िन्दगी
तेरे लिए तो आई
इस दुनिया में मैं
तेरे लिए ही जिऊँ
तेरे लिए ही मरूँ
मेरी चाहत हमेशा से
थी बस यही।।।।
कोई फासला ना हो
तेरे मेरे दरमियाँ
मेरी चाहत हमेशा से
थी बस यही।।।।।