पेड़ की घनी छांव मे, उन्ही की तो बांहो मे
हम थे वैसे सोये हुए, बेफिक्र थे बस खोये हुए
सहसा वह बोल उठी, मन में जो था बोल उठी
इतना प्यार क्यों करते हो?, इकरार इतना क्यों करते हो
आंखें मैने अपनी खोली, वह मुझे थी देख रही
थोडी वह गभरायी थी, थोडी वह शरमायी थी
पहले थोडा सोचा मैने, फिर बात ये बतायी मैने
प्यार तो तब ही होता है, कोइ जब अपना लगता है
और तुम तो मेरी हो, फिर क्यूँ हमसे पूछती हो?
प्यार तूम्ही से हम ने किया, तूमको ही मैने दिल ये दिया
छांव कभी क्या पूछती है!,पेड़ के साथ वह रहती है
पेड़ अधूरा छांव बिना, मैं हुं अधूरा तेरे बिना
जैसे गीत अधूरा संगीत बिना, वैसे मैं हुं अधूरा तेरे बिना
तूम आये जब पास मेरे, पूरे हुए सब ख्वाब मेरे
फिर आंखें उसकी बोल उठी, आंसू बनके छलक उठी
प्यार भरी इन आंखों से, बस मुझको वह देख रही
पेड हमारी बाते सून, अंदर ही अंदर खूश हुआँ
बारिश फिर फूलों कि, हम पर वह था करता रहा
#Kavyotsav_2