#KAVYOTSAV --2
#प्रेरणादायक
नये संकल्प
नए संकल्पों की चादर से
अब गठरी नई बनाना है...
नए उम्मीदों के सागर से
कुछ मोती लूट के लाना है।
जुगनुओं सी आशाऐं लेके
हम अर्ध रात्रि निकल पड़े....
इन आशाओं की तपन से
अब चट्टानों को पिघलाना है।
इन तूफानी सी हवाओं के
रुख जरा विराम नहीं लेते...
जिस पल भी अल्प विराम ये लें
उस पल को छीन के लाना है।
जिंदगी से ज़िद करली अब तो
आसमानों को समझाना है....
मेरे हिस्से के तारे दे दो!
वर्ना फिर नौच के लाना है।
नए संकल्पों की चादर से
अब गठरी नई बनाना है..
नए उम्मीदों के सागर से
"सुमन" मोती लूट के लाना है।
सीमा शिवहरे" सुमन"
भोपाल मध्यप्रदेश