#KAVYOTASV --2
हास्य व्यंग्य-
सफाई अभियान
हाय रे जो सफाई अभियान, हमसे भी खासमखास..
घरवाली ले झाड़ू फिरे , भटकेंगे कैसे पास।
रोमांस को तो चांसई नय्यैं, जीवन लगे बेकार..
गलती से हमने करीब जो कोशिश ,घल गई झाड़ू चार।
अब हम नये- नये पति बेचारे, समय काटें खेल के तास..
घरवाली ले झाड़ू फिरे ,भटकें कैसे पास ।
मुंह पे जालिम कपड़ा बांधे ,कर न सकें दीदार..
इक हफ्ता से ज्यादा हो गओ, तेरो यार पड़ो बीमार।
बिन देखे तो तुमको सजनी बुझे न प्यार की प्यास..
घरवाली ले झाड़ू फिरे भटकें कैसे पास।
जाले के झाड़ू से हिल गओ ,घर की बिजली को तार..
बड़े दिनों के बाद, मौका दे गओ हमें अंधकार।
हमने भी आई लव यू के दई , बांह पकड़ चार बार..
बिजली आई वे दद्दा निकरे , बहुत पड़ी तब मार।
कब खतम हुय्ये जो सफाई ,कब पूरी होगी आस..
घरवाली ले झाड़ू फिरे ,भटकें कैसे पास।
आॅफिस से डस्टबीन है चोरी, घर में सफाई में भिड़ी है गोरी..
जेब से निकार के फैंक पाते , पुरानो केले को छिलको काश!
कोई दूसरी भी तो घांस न डारे, हमाए पास से आ रई बास।
घरवाली ले झाड़ू फिरे भटकें कैसे पास।
आज चौक तो कल इतवारा, सफाई को सदा रये तैयार.
दो दिन से खाना नई बनो , खारये बासी रोटी संग अचार।
हड्डी सी दिखन लगी शरीर में, नई रओ अब मांस..
तुम बिन हमको लगे हैं सजनी, हम हैं जिंदा लास।
हाय रे जो सफाई अभियान ,हमसे भी खासमखास..
घरवाली ले झाड़ू फिरे भटकें कैसे पास।
सीमा शिवहरे "सुमन"
भोपाल मध्यप्रदेश