: #काव्योत्सव2
सुनो न .
पगला है ना
सूरज मुखी का फूल
जो रोजाना ताकता है
सूरज का चेहरा
और उदास हो जाता है
हर शाम
उसके अस्त होते ही
जानता है कि
कभी सूरज उसका नही होगा
फिर भी उसकी रौनक
उसी से है
नादाँ है न
नही जानता है सूरज की गर्मी
जला देगी उसकी कोमल पंखुरियो को
सुनो न, शायद प्यार इसी को कहते हैं||
- Neelima Sharrma