दो नैना और एक कहानी
थोड़ा सा बादल
थोड़ा सा पानी
और एक कहानी
छोटी सी दो झीलों में वो
बहती रहती है
कोई सुने या ना सुने
कहती रहती है
कुछ लिख के और कुछ ज़ुबानी
थोड़ा सा बादल
थोड़ा सा पानी
और एक कहानी
थोड़ी सी है जानी हुई
थोड़ी सी नई
जहाँ रुके आँसू वहीं
पुरी हो गई
है तो नई फिर भी है पुरानी
थोड़ा सा बादल
थोड़ा सा पानी
और एक कहानी
एक ख़त्म हो तो दूसरी
रात आ जाती है
होंठों पे फिर भूली हुई
बात आ जाती है
दो नैनों की है ये कहानी
थोड़ा सा बादल
थोड़ा सा पानी
और एक कहानी