Hindi Quote in Religious by Savita Gupta

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# moral story

2. निन्यानवे का फेर 


प्रात:काल का समय था। एक बलिष्ठ व्यक्ति पेड़ के नीचे बैठा हुआ था। उसी समय एक नवाब हाथी पर सवार होकर उधर से निकले। बलिष्ठ व्यक्ति को जाने क्या सूझी कि उछल कर हाथी की पूंछ पकड़ ली।  पकड़ इतनी मजबूत थी कि हाथी एक पग भी आगे न चल सका। सबके सामने बड़ी हंसी हुई कि एक व्यक्ति ने हाथी को रोक दिया। 

नवाबियत खत्म हो चुकी थी लेकिन ठसका बचा था। नवाब की सबके सामने बड़ी हंसी हुई कि एक व्यक्ति ने उनके हाथी को रोक दिया। हवेली में लौटने पर नबाब बड़े बेचैन थे कि कहीं कल भी वह व्यक्ति ऐसी हरकत न दोहरा दे ?

नवाब की परेशानी उनके एक कारिंदे ने भाँप ली। वह बोला –

”चिंता न करें, कुछ दिन बाद आपकी यह समस्या हल हो जायेगी।”

कारिंदे ने उस व्यक्ति के पास खबर भिजवाई कि नवाब आप की बहादुरी से बहुत प्रसन्न हैं। आप कल से  जीवन निर्वाह के लिए नित्य दस रुपये ले जाया करें।"

व्यक्ति के मन में मुफ्त में मिलते धन का लालच आ गया। वह हवेली से रोज दस रूपये पाने लगा और इस प्रकार पाए मुफ्त के रुपयों को जोड़ने लगा। रोज़ हिसाब लगाता कि एक माह में कितने रूपये जुड़ जाएँगे। वह अपने दैनिक खर्च में भी कंजूसी करने लगा। मन में  लोभ भी पैदा हो गया, सोचता –

”क्या पता किसी दिन नवाब प्रसन्न होकर और अधिक धन देने लगे।”

अब वह दिन-रात रुपयों को जमा करने के फेर में पड़ा रहता। निन्यानवे के फेर में सारी मस्ती चली गयी, स्वास्थ्य चौपट हो गया। आत्मविश्वास भी जाता रहा।

एक माह बाद फिर नवाब हाथी पर सवार होकर उसी रास्ते पर निकले। व्यक्ति ने उछल कर हाथी की पूंछ पकड़ ली। इस बार वह हाथी के साथ घिसटता चला गया।

निन्यानवे के फेर में, लोभ और चिंता ने उसका स्वास्थ्य चौपट कर दिया था।

-सविता इन्द्र गुप्ता,

गुरुग्राम , हरियाणा। 

Hindi Religious by Savita Gupta : 111136644
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