#Moral stories
1. दिव्य अनुभूति
मन की शान्ति
की आकांक्षा लिए शर्मा जी अपने कुल-गुरू की बहुत सेवा किया करते थे। एक दिन अपने मन की बेचैनी प्रगट कर दी,
”गुरूजी महाराज, मुझ पर ईश्वर का दिया हुआ सब कुछ है। लेकिन ना दिन में शान्ति है, ना रातों में गहरी नींद। क्या करूँ?“
”आज मेरे साथ पास की पहाड़ी पर चलो। वहीं इस प्रश्न का उत्तर देंगे। हाँ, ऐसा करो, चलते समय अपने साथ कुछ बड़े-बड़े पत्थर अवश्य ले लेना।” गुरूजी ने कहा।
वे पहाड़ी पर चढने लगे। कुछ दूर चलने पर शर्मा जी बोले,
“गुरुजी, पत्थर बहुत भारी हैं…चलना कठिन हो रहा है।”
”वत्स, एक पत्थर फेंक दो, भार कुछ कम हो जाएगा।” गुरूजी बोले।
वे फिर पहाड़ी पर चढ़ने लगे। शर्मा जी को बोझ के कारण फिर से थकान होने लगी। गुरूजी ने कुछ पत्थर और फिंकवा दिये। थोड़ा और ऊपर चढ़ने पर शर्मा जी ने फिर थकान की शिकायत की। गुरूजी ने शेष पत्थर फेंकने के लिए कहा। सब पत्थर फेंक कर शर्मा आसानी से पहाड़ी पर चढ़ने लगे। गुरूजी ने पूछा- ”इतने सारे पत्थर सिर पर रख कर क्या तुम पहाड़ी के शिखर तक चढ़ सकते थे ?”
“बिलकुल नहीं गुरूजी, चढना असंभव था।”
गुरु जी मुस्कराए और बोले, "अब इन पत्थरों को भौतिक लालसाएं समझो। जितनी कम कामनाएं होंगी, जिंदगी में उतनी ही शान्ति, तब दिव्य अनुभूति का आनंद भी आएगा।”
-सविता इन्द्र गुप्ता,
गुरुग्राम , हरियाणा।