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हवन
कल्याणी देवी की कोठी में हवन की तैयारी चल रही है। कल्याणी देवी गाँव की सबसे संपन्न परिवार की महिला है।
मनोहर बोला, "मालकिन हवन की तैयारी हो गई। पहले इस घर में कितनी रौनक थी।" घर की सुख-शांति के लिए तो साल में दो-तीन बार हवन करवाती हूँ। कल्याणी देवी ने कहा।
"माँ पं. शिवप्रसाद की पत्नी बीमार है उन्होंने आने से मना कर दिया।" सोमेश बोला। "ठीक है मैं जाकर देखती हूँ।"
मंदिर में कोई नहीं मिला। एक ब्राह्मण दिखा। जी राम! राम! मैं कल्याणी देवी घर में हवन करवाना है चलिए।" "मुझ गरीब ब्राह्मण से करवाना है?
आपका कुल क्या है? कल्याणी देवी ने पूछा। "जी मुझे मेरे पिता केशवचंद ने गोद लिया था अब ब्राह्मण कुल है।" 'चले माताजी'? रहने दे। घर में सुख शांति वैसे नहीं है। घर मलिन हो जाएगा। ब्राह्मण ने कहा, सुख-शांति मन की है। हवन एक संतुष्टि है। हवन रूपी जीवन में आहुति अपने मलिन विचारों व संक्रीण सोच की डालो।
कल्याणी देवी सोचती है क्या यह सही है? घरेलू हिंसा में बेटे का साथ देने पर बहू रंजना ने घर छोड़ दिया। बेटी सुप्रिया के अंतरजातीय विवाह करने पर बेटी से सम्बन्ध तोड़ लिए। नौकरानी की बेटी की पढ़ाई रुकवाई।
साल बाद घर में हवन होगा। घर की बहू ने ज़िम्मेदारी संभाल ली। जिसे कल्याणी माफ़ी मांगकर ले आई। बेटी से बातचीत शुरू की। बच्ची का स्कूल में दाखिला करवाया। हवन वही ग़रीब ब्राह्मण करेगा जिसने कल्याणी देवी को समझाया कि हवन में आहुति की सामग्री क्या डाले।