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दिवाली के बाद
सुमित आज खुश था। ऑफिस में प्रमोशन हो गया था। वह एक टेलिकॉम कंपनी का सीनियर मैनेजर बन चुका था। दिवाली का बोनस और यह प्रमोशन।
ऑफिस से निकलकर जैसे ही घर पंहुचा उसने पत्नी मीरा और बच्चो से कहा, “बाज़ार चलो खरीदारी करने इस बार दिवाली यादगार बनाएँगें।"
सब बाज़ार गए, खरीदारी हुई। आठ साल का सोनू बोला पापा “ पटाखे नहीं खरीदे? “ सुमित को याद आया पटाखों पर कोर्ट ने प्रतिबंध लगा दिया हैं तभी पटाखे किसी दुकान पर नज़र नहीं आ रहे। वह बोला, ”बेटा शाम तक पटाखे आ जायेंगे।”
शाम को जब सुमित पटाखें लेकर पहुँचा तो बच्चे खुश हो गए। मीरा ने पूछा तो बताया दोस्त की बंद पटाखों की फैक्ट्री का जुगाड़ हैं अपना काम बन गया।
दस हज़ार के पटाखे और आतिशबाजी जलाई गई दिवाली के ठीक हफ्ते बाद मीरा ने सुमित को ऑफिस में फ़ोन कर अस्पताल ‘चाचा नेहरु’ में बुलाया। डॉक्टर ने कहा, “आपके बच्चे के फेफड़ो में धुआँ घुस गया हैं, जिस वजह से सांस लेने में परेशानी हो रही हैं। सुमित और मीरा टूट ही गए, जब डॉक्टर ने सोनू को अस्थमा बता दिया और हिदायत दी कि धुएं से दूर रखे। आज मीरा सुमित को रोते हए कह रही थी कि “हाय! दिवाली के बाद यह क्या हो गया सीमित? इससे अच्छे तो हम पहले थे। पर सुमित की नज़रे रद्दी में पड़े उस पुराने अख़बार पर थी, जिसे उसने पढ़कर भी नहीं पढ़ा था कि ‘सुप्रीम कोर्ट ने पटाखों पर लगाया प्रतिबंध’।।