#moral stories ॥मत की कीमत ॥
हर बार प्रधान का चुनाव वाले जितेंद्र सिंह जी को इस बार राष्ट्रीय पार्टी ने सांसद के चुनाव के लिए मैदान में उतारा था । हर चुनाव में जितेंद्र सिंह जी बहुत से वादे करते थे लेकिन उन्हें पूरा करना भूल जाते थे । इस बार जितेन्द्र जी अपनी हर जनसभा में जनता से अनेक वादों के साथ यह वादा भी जरुर दोहराते –” भाइयों ,!बहनों !आप हमें वोट देकर जिताएंगे तो हम भी विकास कार्यों के साथ कस्बे के सभी बेरोजगार युवाओं औंर महिलाओं को हर महीने रू5000 बेरोजगारी भत्ता देंगे । “इस घोषणा के बाद उनकी जनसभा में खूब तालियां बजती ।लेकिन यह बात कुछ नवयुवकों को अखरती थी ।उन्होंने आपस मे कुछ सलाह - मशवरा किया ।
एक दिन जितेंद्र सिंह जी कस्बे के चौक पर अपनी सभा करते हुए अपने वादो को दोहराते हुए बेरोजगार युवा औंर महिलाओं को भत्ता देने का वादा करने लगे तो उन नवयुवकों से रहा न गया ।
सभी उनका विरोध करते हुए कहने लगे -“सर हम लोगों को बेरोजगारी भत्ता नही बल्कि हमें रोजगार चाहिए। आप हमारे कस्बे मे कोई फैक्ट्री या उद्योग लगवा दे ,जहां हमें नौकरी मिल सके। आप भत्ता देकर आलसी औंर काहिल लोगों की फौज बनाना चाहते हैं। “
ऐलान करते हुए –“ जो हमें रोजगार देगा , हम अपना कीमती भी वोट उसी को देगें । “ इस बात का हर व्यक्ति ने समर्थन करते हुए वोट ना देने का ऐलान कर दिया । जितेंद्र सिंह जी नजरें चुराने लगें , क्योंकि रोजगार देंने का उनके व उनकी पार्टी के पास कोई प्लान नहीं था ।