इन दो दिनों में ...।
मैंने बहुत कुछ खोया है ।
पहले डेटा ऑफ किया
वक़्त के कांटो से खुदको तोड़ा है ।
पता नही जितना तोड़ा उतना जोड़ा फिरसे ख़ुदको तोड़ा है।
फ़िर सारे अरमानों को मोड़ना चाहा ,
हर बार हमने ख़ुद को ही छोड़ा है ।
बातों में जीना रातों में जगना
सपनो को सारे मेने आंसुओ से जलाया है ।
इन दो दिनों में ...।
मैंने बहुत कुछ खोया है ।
खेतों में घूमते गुलेरिया ,फूल आम को देख्ते
छुपते छुपाते सारे रिस्तो से,
हर क़दम पे तुमको और करिब पाया है ।
इन दो दिनों में ...।
मैंने बहुत कुछ खोया है ।
आरज़ू तेरी भुलने की या फिर दूर भागने की
मग़र जुड़ा हुआ तुमने भी कही ख़ुदको जाना है।
ऑफ़ मोबाईल था धड़कता दिल तुजसे अलग नही हो पाया है ।
इन दो दिनों में ...।
मैंने बहुत कुछ खोया है ।