#moralstories
मुद्दा
"सुषमा, देखा तूने उस लफंगी को, आज फिर कोई नया आशिक पकड़ लिया । "
"हां ,देखा रमा जी इसे तो कोई और काम नहीं है सारे मोहल्ले का माहौल खराब कर रखा है इसने। जवान लड़की को इतनी छूट दे रखी है।"
" हां, सुषमा मेरी लड़की अगर ऐसी होती तो उसकी टांगे तोड़ देती।" रमा बोली
"खैर, इनका ही मुंह काला करेगी। मेरी मोना तो मजाल है कभी किसी लड़के के साथ ऐसे चली जाए।" सुषमा बोली
कुछ ही दिनों बाद कॉलोनी के पार्क में औरतो का समूह चर्चारत था ।
"क्या ? मोना बॉयफ्रेंड के साथ भाग गई।"
"हां , लगती तो ऐसी सीधी-सादी थी जैसे गऊ हो ।"राधा बोली
" उसकी मां को रानू पर नजर रखने से फुर्सत मिलती तो अपनी बेटी को संभालती। " रमा बोली
"धीरे बोल रानू की मां पार्क में टहल रही है। कहीं सुन लिया तो आ धमकेगी।"
तभी पीछे से मिसेज वर्मा बोली "धमक गई बोलो । चलो मोना के भागने से आपने मेरी बेटी रानू का पीछा छोड़ किसी दूसरे मुद्दे पर बात की। वरना मेरी बेटी रानू के चरित्र पर कहानियां गढ़ने के अलावा आपके पास कोई काम नहीं होता । मेरी बेटी कहां,किसके साथ जाती है, मुझे सब पता होता है । जींस पहनने से मेरी बेटी चरित्रहीन नहीं हो जाती। एक महिला को दूसरी का सम्मान करना चाहिए । सच यही है जहां ज्यादा बंधन होगा वही छटपटाहट भी ज्यादा होगी और जहां स्वतंत्रता होगी वहां आत्मविश्वास और पारदर्शिता होगी।"
मौलिक एवं स्वरचित