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भोली-सी सीख
कहते हैं जिंदगी हरदिन-हरपल हमें कुछ न कुछ सिखाती ही है। एक दिन की बात है कि मैं और मेरा बेटा बाज़ार जूते की दुकान पर रात नौ बजे गए। दुकान पर एक नौकर जूते चप्पल दिखा रहा था । तभी अचानक ही वह नौकर घर जाने की जल्दी में दूसरे को आवाज़ लगाते हुए कहा, ‘सुनो तुम मैम को चप्पल दिखा देना, मैं घर चला’ और छटपट निकल गया। मालिक ने भी कहा, ‘ठीक है। अपनी बिटिया को छठवें जन्मदिन पर मेरा आशीष देना।’ हमनेे अपने लिए चप्पल खरीदे, साथ ही बिटिया के लिए एक जूता भी लिया।
अगली सुबह 12 बजे, मैं बिटिया के साथ जूते बदलने के लिए दुकान पर अभी पहुॅची ही थी कि शोर सुनाई दी पास जाकर देखा तो उसी नौकर गोपाल को मालिक व आस पास के लोग बहुत डाॅंट रहे थे और पुलिस की धमकी भी दे रहे थे। मुझे यह समझते देर नहीं लगी कि उसने चोरी की है। गोपाल सिर झुकाए घुटने के बल रो रहा था, माफ़ी की गुहार लगा रहा था। मालिक पुलिस को फोन करने ही वाला था कि मैंने उसे रोकते हुए कहा, ‘नहीं ऐसा ना करें।’ मैंने पूछा, ‘गोपाल, तुमने चोरी क्यों की?’ उसने कहा, ‘बहन मेरी बिटिया का जन्मदिन था इसलिए मैं गलत काम करने को मजबूर हो गया।’ ‘लेकिन क्या तुम्हें ऐसा करना चाहिए था? क्या तुम्हारी बेटी यह जानकर प्रसन्न होगी कि पिताजी चोरी कर चप्पल लाएॅं हैं।’-मैंने पूछा। तभी तपाक् से मेरी 6 वर्षीय बिटिया ने कहा, ‘बाबा चोरी करना बुरी बात है। आप को किसी ने नहीं सिखाया।’ गोपाल बेहद शर्मिंदा हुआ ,सबके सामने चोरी ना करने की कसम खाईं। उसके चप्पल के भी पैसे मैंने दे दिए।
............................अर्चना सिेह जया