Hindi Quote in Story by manohar chamoli manu

Story quotes are very popular on BitesApp with millions of authors writing small inspirational quotes in Hindi daily and inspiring the readers, you can start writing today and fulfill your life of becoming the quotes writer or poem writer.

'खुद पर खर्च किया'

-मनोहर चमोली ‘मनु’

दुनिया के अरबपति इकट्ठा थे। एक-एक कर सब अपनी सफलता की कहानियाँ सुना रहे थे। अब घोषणा हुई-‘दूध वाली।’

नीतनबाई मंच पर आई। किसी ने पूछा,‘‘नीतनबाई। अपने सफर के बारे में बताइए।’’ नीतनबाई ने जवाब दिया,‘‘मैंने रुपया बचाया नहीं। खुद पर खर्च किया।’’ सभागार में खामोशी पसर गई।

नीतनबाई बताने लगीं,‘‘बचपन में आधा लीटर दूध का पतीला गिर गया था। खूब डांट पड़ी थी। घर पर दूधवाला पैदल आता था। फिर वो साईकिल में आने लगा था। मैं सोचती थी। दूधवाले के मज़े हैं। फिर पता चला कि वो तो दूध इकट्ठा करता है। पता चला कि ग्वाला दूध दूहता है। उसके मज़े हैं। फिर पता चला कि गाय वाले के मज़े हैं। बाद में पता चला कि गाय से अधिक दूध तो भैंस देती है। फिर पता चला कि भैंसों की डेयरी होती है। दूध से अधिक दाम तो मक्खन के हैं। मक्खन से अधिक कीमत तो घी की है।’’

किसी ने खामोशी को जगाया। एक सवाल ने पुकारा,‘‘खुद पर ख़र्च वाली बात समझ में नहीं आई।’’

नीतनबाई ने मुस्कराते हुए आगे कहा,‘‘मैंने चीज़ों के गुणों को पहचाना। अपने हुनर बढ़ाए। पहले दूध बेचा। दूध बेचकर गाय खरीदी। दूध दूहना सीखा। फिर भैंस खरीदी। फिर खुद एक डेयरी खोली। चारा उगाया। हरियाली बोना सीखा। दूध से मक्खन बनाना सीखा। फिर . . . .’’

सभागार में पसरी चुप्पी की जगह तालियों की गड़गड़ाहट ने ले ली।
सक्सेस मंत्रा का ताज़ नीतनबाई के माथे पर चमक रहा था।
॰॰॰
#MoralStories

Hindi Story by manohar chamoli manu : 111124875
New bites

The best sellers write on Matrubharti, do you?

Start Writing Now