Hindi Quote in Story by मनोहर चमोली मनु

Story quotes are very popular on BitesApp with millions of authors writing small inspirational quotes in Hindi daily and inspiring the readers, you can start writing today and fulfill your life of becoming the quotes writer or poem writer.

'बहुत या कम'

-मनोहर चमोली ‘मनु’

‘‘अब मैं बड़ा हो गया हूँ। मैं खुद अपना कारोबार खड़ा करना चाहता हूँ। चार-पाँच लाख रुपए ही तो माँग रहा हूँ। यह रकम तो आपके एक दिन के मुनाफे से काफी कम है। समझा करो पापा।’’ विपुल बोला।
जमनादास जाने-माने उद्योगपति हैं। उनका कारोबार कई शहरों में है। विपुल जमनादास का इकलौता बेटा है। आज वह अपने पिता से मिलने आया। विपुल अब खुद का अपना कोई कारोबार करना चाहता है।
जमनादास मुस्कराए। बोले,‘‘चाय पिओगे या काॅफी?’’ विपुल ने नाराज़गी से जवाब दिया,‘‘चाय।’’ पिता ने केतली में पानी उबाला। दो कपों में उड़ेल दिया। शक्कर के क्यूब डाले ही थे कि विपुल चीख पड़ा,‘‘यह क्या कर दिया? एक कप में पाँच क्यूब ! इतनी शक्कर से तो पाँच-छःह कप चाय बन जाती।’’
पिता ने मुस्कराते हुए कहा,‘‘सही कहते हो। बहुत और कम का अन्तर समझना ज़रूरी है। अपना कारोबार शुरू करने के लिए लाखों की क्या ज़रूरत है? कारोबार तो थोड़े से भी शुरू हो सकता है। है न?’’ विपुल ने सिर झुका लिया। बोला,‘‘मैं समझ गया। साॅरी पापा। अब मैं कुछ महीने काम करूंगा। काम के बदले जो वेतन मिलेगा। उससे ही कोई कारोबार शुरू करूंगा।’’ यह कहकर वह जाने लगा।
पिता ने कहा,‘‘रुको। चले जाना। दो कप चाय बनाओ। मुझे भी पिलाओ।’’ दोनो हँस पड़े। विपुल चाय बनाने लगा।
॰॰॰
#MoralStories

Hindi Story by मनोहर चमोली मनु : 111123999
New bites

The best sellers write on Matrubharti, do you?

Start Writing Now