હાય, માતૃભારતી પર આ વાર્તા 'दास्तान-ए-अश्क - 10' વાંચો
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एक नारी के स्वाभिमान को ठेस पहुंचा कर उसकी अस्मत को तार तार करके जिंदगी को अश्कों के समंदर में धकेलने वाले.. बेदर्दी इंसान की कहानी..!
जिसने अपने निजी स्वार्थ के लिए..! अपनी शरीके हयात की जिंदगी तबाह कर दी... पढ़ना ना भूले दास्तान-ए-अश्क एक संवेदनशील कहानी
दास्तान के कुछ अंश
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दास्तान-ए-अश्क
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जैसे-जैसे वह थोड़ा बड़ा हो रहा था!
नन्ना धीरे धीरे अपनी जिंदगी की तरफ लौट रहा था!
घर के सामने एक मैदान साथ पड़ा था! उसमें डॉगी ने कुछ बच्चे को जन्म दिया! नन्ने को लेकर वह अक्सर उसके पास चली जाती थी! छोटे छोटे डॉगी के पिल्लो को दूध दे आती थी! दूध पीते पीते वह पिल्ले दौड़ कर उसे इर्द-गिर्द घेरा डालकर उछल कूद करने लगते थे नन्ना काफी खुश हो जाता था उनके साथ भी एक लगाव सा हो गया था..! दूसरी सुबह जब वह उठी तो वहां एक भी बच्चा नहीं था! उन पिल्लों की मां गुमसुम इधर-उधर दौड़ रही थी, और देख रही थी डॉगी की हालत देखकर वह घबरा गई!
बावली सी होकर वो भागकर उस मैदान में पहुंच गई !
डॉगी की आंख में आंसू थे !
दूध से भरे उसके आंचल से दूध बहने लगा था!
एक मां की तड़प को उसने महसूस की..! उससे रहा न गया!
अड़ोस पड़ोस की औरतों को बात की..!
फिर सब ने मिलकर बच्चों को इधर-उधर ढूंढा..!
उसकी कोशिश रंग लाई.. अपनी जगह से दूर हुए बच्चे लकड़ियों मलबे में छुप गए थे..! उन सब को अपनी जगह पर लाने काफी मशक्कत उठानी पड़ी..!
उन्हें अपनी मां के पास पहुंचाया..,!
सारे बच्चे दौड़ कर उसकी मां के आंचल से उछलकर दूध पीने लगे ..!
औरतों की भीड़ में से कोई चीख उठा था अरे बच्चों की मां तो रो रही है.!
डोगी की आंखों में उसने पहली बार आंसू देखे..!
अपने नन्ने को उसने सीने से लगा लिया!
आंखे बरबस ही बरस रही थी..! एक माँ का अपने बच्चो से मिलन देखकर..!
एक जानवर अपने बच्चों के लिए ईतना फिक्रमंद था तो वो कैसे अपने नन्ने के लिए गैर जिम्मेदार हो सकती थी?
नन्ने की मां का भी हौसला बढ रहा था !उसे लग रहा था कि शायद भगवान उसकी सुन रहे हैं !उसकी आशाओं और उम्मीदों का एक ही द्वार था और वह था उसका नन्ना ..! उस को दी जाने वाली परवरिश..!