?निगाहें नाज करती है ..
फलक के आशियाने से.. !
"खुदा भी रूठ जाता है "
किसी का दिल दुखाने से ...
"सजदे" की "खूबसूरती" भी क्या "कमाल" की रही...!!हमने "फर्श" पर "सर" रखा और दुआ "अर्श" पर "कुबूल" हो गई...
कितने ऐबों से छुपा रखा है मेरे "अल्लाह" ने मुझ गुनाहगार को
लोग आज भी मुझसे कहते है,
" दुवा मैं याद रखना "
मेरे रब की रहमत का भी अन्दाज़ है निराला...!!
सब कुछ दे कर भी कहता है, कोई है मांगने वाला...!!
*?"रात सुबह का इंतज़ार नहीं करती",*
*"खुशबु मौसम का इंतज़ार नहीं करती".!*
*"जो भी ख़ुशी मिले उसका आनंद लिया करो",,*
*"क्योंकि जिंदगी वक़्त का इंतज़ार नहीं*
*करती"..!?*