"महाशिवरात्रि पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ"
"सत्यम शिवम सुंदरम"
शिव भोले हैं और बहुत आसानी से प्रसन्न हो जाते हैं और हमेशा दूसरों की मदद करने के लिए तत्पर हो जाते हैं,यहाँ तक की सृष्टि के कल्याण के लिए विष भी पीने को तैयार हो जाते हैं लेकिन ऐसे भोले और कल्याण कारी शिव गलत बात जरा भी सहन नहीं कर पाते और जब शिव को क्रोध आता है तो उनके तीसरे नेत्र से सृष्टि में कोई भी नहीं बच पाता है।उनमें चंद्रमा की शीतलता है तो शमशान की राख भी,वो एकनिष्ठ प्रेमी हैं तो एकनिष्ठ वैरागी भी।
प्रांंजल,
1/10/18,11.30A