.... अनदेखे धागों में,
यूं बाँध गया कोई...
की वो साथ भी नहीं,
और हम आज़ाद भी नहीं।।।
नज़रों में केद,
यूं हो गया कोई...
की वो आँखों में भी नहीं,
और हम आज़ाद भी नहीं।।।
अपने दिल में केद,
यूं कर गया कोई...
की वो धडकनों में भी नहीं,
और हम आज़ाद भी नहीं।।।
अपने सवालों में केद,
यूं कर गया कोई,
की वो जवाबो में भी नहीं,
और हम आज़ाद भी नहीं।।।