नारी जीवन एक झूला है
कभी इस पार चले
कभी उस पार चले।
सौ दर्द सहे और कुछ न कहे
बस आँखों से जलधार बहे।
नारी जीवन एक झूला है
कभी इस पार रहे
कभी उस पार चले।।
नारी है और कमजोर भी है
औरों के लिए भोग भी है।
अपना कुछ भी न जीवन में
बस जीती है घर उपवन में
हर छण में जीती मरती है
दिल में दर्द का गुब्बार लिए।
नारी जीवन एक झूला है
कभी इस पार चले
कभी उस पार चले।।