नायक नायिका के बीच की नोक झोंक
ऋतु है आयी बसंती, सताने लगे,
मेरी गलियों का चक्कर लगाने लगे,
बस नजर थी मिली, इक हुआ हादसा,
देख पापा को, कुत्ते भगाने लगे।।
ऋतु है आयी बसंती, सताने लगी,
खत को पढ़कर मेरे मुस्कुराने लगी,
इक खता बस हुई, खत पे चटनी गिरी,
वो समझ पान उसको चबाने लगी।।
तुम कहाँ थे गए, तुमको ढूंढा बहुत,
ना मिले फ्राइडे, गुस्सा फुटा बहुत,
देख लो प्रियतमा कितना सूजा हूँ मैं,
तेरे चच्चा ने उस दिन था कूटा मुझे।।
- राकेश सागर