ओ प्यार:
ओ प्यार, मेरे साथ उठ
मेरे साथ बैठ,
कुछ हिमालय की बात कर
बर्फ सी आवाज में बुला
हवा की तरह उड़कर आ
कानों के अगल बगल सुरसुरा,
चुपचाप चल
उस चढ़ाई पर जो चढ़ी नहीं गयी।
उस जगह पर फूल चढ़ा
जहाँ साथ साथ थे,
अपनी बातें सुन
अनेक मुँहों से अनेक प्रकार ,
जो हुआ वह भी
जो नहीं हुआ वह भी।
जब तेरे पंखों पर मेरे प्राण उड़े थे
कितना सुनहरा हो गया था आसमान,
जो करवटें बदली थीं
वे जानदार थीं,
जो बातें शरमायी थीं
वे सच्ची थीं।
- महेश रौतेला