दो दिन पहले का किस्सा
गाय को माता जो माना
उसका दूध है जो पीना
शाम को नीकलती
देखती कचरे में थैलीया भी फैंकी जाती थी
गई अजनबी के घर
था सिंधी का घर
कहा ये कचरा फैको
जरा ध्यान रखो
न जाने पाए प्लास्टीककी थैली
पर कहा हमारे घर से ना हो सके
बस मेरा काम था केहना
सो केह दिया
गाय है माता
उसका दूध है पीया जाता
ना फैके थैली तो रहेगा अच्छा
अगर आपके घर से फैंकी है तो
गलती न हो दुबारा
पर सच को ना स्विकारा
कल फीर देखा
कचरे में फेंकी थी थैलीया
ड्राईवर को शर्म आई
पर मालीक को न आई
घर में जाकर सभ्य भाषा में समझाया था
देखते है कब शर्म आती है
रोज नीकलु पर
ऐसा बुरा हाल कहीं न देखु
मैंने अपना काम कर दिया
कभी न कभी तो शर्म आएगी
मैं तो अपना काम करती चली जाऊंगी...ॐD