गीत:-अपना दस्तूर है इतना
अपने हर जख़्म पर मरहम लगाना जानते हैं ।
अपना दस्तूर इतना है कि उनको…, देखकरके ।
बस , मुस्कराना …मुस्कराना…जानते हैं……।
अपने हर जख़्म……………
दिलों को तोड़ना आदत है जिनकी जानते हैं ,
उनकी हर चाल की हर…चाल को पहचानते हैं ।
उनसे नजरें मिलना …दिल चुराना जानते हैं ।।
अपने हर जख़्म……………
उनका नखरे बनाना … इतराना…एक अदा है ,
रूठ जाना वो उनका…तरसाना…एक अदा है ।
उनका हर नाज हर नखरा उठाना…जानते हैं ।।
अपने हर जख़्म……………
कोई पूछे अगर क्या …? उनके दिल में भी जगह है ,
तब्बसुम लब हैं उनके …और निंगहें कातिलाना ।
उनके हर वार से बचना …बचाना… जानते है ।।
अपने हर जख़्म……………
-पन्ना