जरा मुझे चोट खाने की वजह दो,
मुजे जाम की एक घुंट तो दो......
तुमे भुलकर भी भुल न पाये यार
इस दिल को तुम्हारी याद तो देदो.....
एसा तो कैसा दर्द है,की तुम इसका हमसे भी जीक्र नहीं कर शक्ते..हमको दर्द छुपाकर हसना तो सिखावो......
ये क्या बात हुई की तुमने अपनी भोली शी मुस्कान की वजाह भी न बताई, हमको भी यु ही मुस्कुराने की वजह तो देदो.....
तुजमे कुछ तो था,की हम सब कुछ छोडकर तुम्हारे पास खीचे चले आये,मुझे ए आवारा पन की वजा भी जाननी है......
हम बच्चो सा मुह बना कर बैठे थे तो हमको भी जरा पता चले की हम क्युं एसे मायुस बनके आये है,जरा हमे भी तो बतावो वजह........
शैमी ओझा......