मेरी नजर पर , तेरी नजर है ।
इस बात की मुझको भी खबर है ।।
टूटे तटबंध उजडी बस्तियाँ हैं ,
बरपा हर ओर सुनामी का कहर है ।
दिलों को दहलाने की हवस में ,
नफरतों के जलते हुए शहर हैं ।
न जुल्म ठाओं ऐ ! दुनियाँ वालों ,
ये कैदे -बुलबुल , लख्ते - जिगर है ।
सिसक रही दर्द से मेरी नस - नस ,
रंजो -गम का कितना असर है ।
नमिता "प्रकाश"