मैं तो तेरे काबिल ही न थी
पर तूने क्यों यह रोग दिया।
मैं भूल गयी खुद की हस्ती
तूने क्या यह जोग किया।।
मैं तितली थी एक स्वच्छ गगन की
तूने कैदी क्यूं बनाया मुझे।
फूलों की ही बस प्यास मुझे थी
बगिया का सपना क्यूं दिखाया मुझे।।
तू माली है या भँवरा है
या है एक नादान बच्चा।
तू माने या न माने
मेरा अहसास है बिलकुल सच्चा।।