आग गुलशन मे लगाने पे तुली है दुनिया ।
विश्वशांति को मिटाने पे तुली है दुनिया ॥
जानती है जान के बिन संभव नहीं है जीवन ।
आग पानी मे लगाने पे तुली है दुनिया ॥
हौसला बढने लगा है बमैक झंडो का, और ।
श्वेत झंडो को डराने पे तुली है दुनिया ॥
होड एसी मची है जग में बडा बनने की ।
कि गरीबो को दबाने पे तुली है दुनिया ॥
रोशनी हो भी तो कैसे हो इधर औ उधर ।
रोशनीयों को बुझाने पे तुली है दुनिया ॥
शांति कैसे होगी स्थापित इस गरमी मे जब ।
आयुधों को फिर सजाने पे तुली है दुनिया ॥