त्याग दु सरीर
तज भी दु प्राण
कैसे मिले मोक्ष उसे
जिसका नहीं संसार
जो है ही नहीं
कैसे खो दे उसे
जो जन्मा ही नहीं
मरने को कैसे हो तैयार
कण भी जिसका
षण भी जिसका
शब्दों मै मौन जो
वही रोशनी वही अंधकार
ना राह है, ना राही वो
ना अंत कोइ मंजिल
आंसू ना तृष्णा कोइ
ना बैर ना है किसका प्यार
साँसों का मुनाफा
कर्ता, नुकसान का कारोबार
वक़्त की कैद से दूर
नहीं फसलों का दीदार
परछाई है जिसकी, दुनिया
जीवन है जिसका सार
है वो नहीं कहीं
पर है सपनो सा विहार