तेरी मेरी कहानी नहीं है पुरानी
तुझे याद नहीं तो सुनाऊं कैसे।
तू मगरूर है मैं मजबूर हूं
जो समझ न आए तो बताऊं कैसे।।
तू जानता नहीं मैं मानती नहीं
तेरी प्रेम दिवानी कहलाऊं कैसे।
तू नयी राह पर मैं खड़ी हूँ यहाँ
तेरे पीछे मैं कदम बढ़ाऊं कैसे।।
चाहूं हर पल तुझे वो बेदर्दी सनम
तू मुझे न बुलाए तो मैं आऊं कैसे।
खड़ी दूर तुझे बस देखती रहूँ
बिना तेरे बता जी मैं पाऊं कैसे।।