गुरु चेला को देउँ पछारी ।
कहे वचन कुछ अइस कुमारी
यह गठबंधन देखि डेराही ं
बाबा राम राम चिल्लाही
दिल्ली की गद्दी का सपना ।
बैठन की करि रही कलपना ।।
बबुआ इक योजना बनावैं
का मन मा.कछु नाहि बतावें ।।
याद न आए कहुँ ब्रह्मदत्ता ।
कीन रहे मायावति रक्षा ।।
सत्ता. सुख.के.मोह ने ।मतिभ्रम है कर दीन।
व्यथा कथा सब लुप्त हो।एक दृष्टि है दीन.।।