Hindi Quote in Blog by Arun Kumar Dwivedi

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देवासुर संग्राम तृतीय लगभग समाप्त प्राय था । आनेवाला निणर्य भी स्पष्ट था ।एक बार पुनः बुद्धि ने बल पर विजय प्राप्त कर ली थी ।अहुरामज्दा जो पृकृति मे देवत्व का पोषक है ।साथ ही सम्पूर्ण आर्य समाज का सबसे बलवान योद्धा है ।आज पराजित हो रहा है उससे जिसमे उधार का बल है लेकिन वह अपने अन्दर मात्र अपने बौद्धिक बल से देवत्व का अनुभव कर रहा है ।इन्द्र मात्र अपने देवत्व के मोह मे उनसे युद्ध लडे जा रहा था ।जिनके साथ उसने हिम मरुस्थल को पार करके सप्तसैंधव की खोज की थी ।जिसके साथ विद्या ग्रहण की थी ।अहुरा को स्मरण था जब प्रथम बार उसे गुरु जी ने अहुरामज्दा की उपाधि दी थी ।उसके बाद तो वह अपना वास्तविक नाम ही भूल गया ।गुरु जी ने कहा था बेटा तू महत् असुर है अर्थात तू सबसे बलवान है । प्रिय बन्धुओं यह असुर महत् के कुछ अंश है यदि सरस लगे तो अवश्य सूचित करें।

Hindi Blog by Arun Kumar Dwivedi : 111074943
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